नमामि गंगे योजना

नमामि गंगे योजना 2020

” नमामि गंगे योजना 2020  “

नमामि गंगे योजना 2020 भारत में गंगा नदी का न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है बल्कि देश की 40% आबादी इस नदी पर निर्भर है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के स्क्वायर मैदान में भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि हम गंगा नदी को साफ रखने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40% आबादी के लिए एक बहुत बड़ी मदद होगी। गंगा नदी की सफाई एक आर्थिक एजेंडा है।

इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और नदी को पुनर्जीवित करने के मकसद से “नमामि गंगे योजना” नामक गंगा संरक्षण मिशन प्रारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गंगा नदी की सफाई के लिए बजट को 4 गुना करते हुए वर्ष 2019- 20 तक 20000 करोड रुपए खर्च करने की घोषणा की। साथ ही इसे 100% केंद्र हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया गया है।

यह ध्यान रखते हुए की गंगा संरक्षण एक बहुत बड़ी चुनौती है यह बहू क्षेत्रीय के साथ-साथ बहुआयामी भी है इसमें कई हितधारकों की भूमिका है साथ ही विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को बेहतर करने का प्रयास तथा केंद्र राज्य स्तर पर योजना के क्रियान्वयन पर बेहतर निगरानी तंत्र को बेहतर किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं  |

कार्यान्वयन को तीन स्तरों पर बांटा गया है प्रथम स्तर की गतिविधियां( तत्काल प्रभाव में दिखने पर) मध्यम अवधि की गतिविधियां ( समय सीमा के 5 वर्ष के भीतर) और लंबी अवधि की गतिविधियां ( समय सीमा के 10 वर्ष के भीतर)

नमामि गंगे योजना शुरुआती स्तर की गतिविधियां-

इस स्तर की गतिविधियों में नदी की ऊपरी सतह की सफाई और बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने, ग्रामीण क्षेत्र की नालियों से आते हुए कचरे, शौचालय का निर्माण, शवदाह गृह का नवीकरण और आधुनिकीकरण ताकि अधजले शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, जनता और नदी के बीच संबंध बेहतर करने के लिए घाटों का निर्माण, मरम्मत और नवीनीकरण जैसी गतिविधियां शामिल की गई है।

नमामि गंगे योजना मध्यम अवधि की गतिविधियां-

इस अवधि की गतिविधियों के अंतर्गत नदी में नगर निगम और उद्योगों से आने वाले कचरे की समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। नगर निगम से आने वाली कचरे की समस्याओं को 5 वर्ष की अवधि में 2500 एमएलडी अतिरिक्त ट्रीटमेंट कैपेसिटी का निर्माण इस योजना के तहत होगा।

इसके अंतर्गत इस योजना को बेहतर करने के लिए वित्तीय सुधार किए जाएंगे। वर्तमान में इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए कैबिनेट हाइब्रिड वार्षिक आधारित पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विचार किया जा रहा है यदि से मंजूरी मिलती है तो विशेष प्रयोजन वाले वाहन मुख्य शहर में प्रबंधन करेंगे, प्रयोग किए जाने वाले पानी के लिए पूरा एक मार्केट तैयार किया जाएगा और परिसंपत्तियों को दीर्घकाल तक स्थिर रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।

औद्योगिक प्रदूषण की समस्याओं के लिए भी बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं गंगा नदी के किनारे स्थित उद्योगों को गंदे पानी को कम करने या इन्हें पूरी तरह से समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं सभी श्रेणी केउद्योगों को समय सीमा दे दी गई है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन नियमों के कार्यान्वयन के लिए पहले ही कार्य योजना बना चुका है।

इस कार्यक्रम के तहत उपर्युक्त गतिविधियों के अतिरिक्त जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण प्रजातियां जैसे गोल्डन महाशीर, डॉल्फिन, घड़ियाल कछुए, उद्बिलाओ आदि को संरक्षण दिया जा रहा है। इसी तरह नमामि गंगे योजना के तहत जल प्रवाह स्तर की वृद्धि, कटाव कम करने और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं |

साथ ही इन सभी में सुधार के लिए 30,000 हेक्टेयर भूमि पर वन लगाए जाएंगे। वनीकरण कार्यक्रम 2016 में शुरू किया गया है। व्यापक स्तर पर जल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए 113 रियल टाइम जल गुणवत्ता निगरानी सेंटर स्थापित किए गए हैं।

लंबी अवधि की गतिविधियां- नमामि गंगे योजना 2020

  1. इस अवधि के अंतर्गत इफ्लो के निर्धारण और बेहतर जल के उपयोग की क्षमता, सिंचाई क्षमता को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा साथ ही नदी प्रवाह को पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
  2. गंगा नदी अपने सामाजिक सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध है
    विश्व में आज तक नदी के संदर्भ में इतना बड़ा कार्यक्रम नहीं चलाया गया है इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए देश के सभी क्षेत्रों और प्रत्येक नागरिक की हिस्सेदारी अनिवार्य है। कई तरीकों से हम सभी गंगा नदी की सफाई में योगदान दे सकते हैं
  3. धनराशि योगदान- विश्व की दूसरी बड़ी जनसंख्या वाले देश की सबसे बड़ी और लंबी नदी की गुणवत्ता को बहाल करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है सरकार ने पहले ही गंगा नदी की स्वच्छता के लिए बजट को 4 गुना किया है अभी भी यह आवश्यकता के हिसाब से कम है अतः स्वच्छ गंगा निधि बनाई गई जिसमें आप सभी गंगा नदी को स्वच्छ करने के लिए अपने सामर्थ्य अनुरूप योगदान दे सकते हैं।

रिड्यूस रीयूज और रिकवरी- नमामि गंगे योजना 2020

हम में से अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं है कि हमारे द्वारा प्रयोग में लिए जाने वाला पानी और घरों की गंदगी अंत में नदियों में जाकर मिलती है। सरकार द्वारा पहले से ही नालियों के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्मित किए गए हैं परंतु लोगों की लापरवाही ओं की वजह से कई जगह फैल रहा है
उपयोग किए गए पानी जैविक कचरे और प्लास्टिक की रिकवरी और इसके पुनः उपयोग तो इस योजना को काफी लाभ मिलेगा।

आइए! आप और हम मिलकर देश की धरोहर संस्कृति और राष्ट्रीय नदी गंगा पुनर्जीवित करने की दिशा में एक कदम बढ़ाए नमामि गंगे योजना 2020।

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